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शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
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भीष्म उवाच
अहं सर्वत्रगो व्रह्मन्भूतग्रामान्तरात्मकः |  ४६   क
भूतग्रामशरीरेषु नश्यत्सु न नशाम्यहम् ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति