शल्य पर्व  अध्याय ३२

दुर्योधन उवाच

तं मत्तमिव मातङ्गं तलशव्देन मानवाः |  ५१   क
भूय़ः संहर्षय़ामासू राजन्दुर्योधनं नृपम् ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति