अनुशासन पर्व  अध्याय ३२

नारद उवाच

अव्भक्षा वाय़ुभक्षाश्च सुधाभक्षाश्च ये सदा |  २२   क
व्रतैश्च विविधैर्युक्तास्तान्नमस्यामि माधव ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति