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शान्ति पर्व
अध्याय ३२
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व्यास उवाच
यदि वा मन्यसे राजन्हठे लोकं प्रतिष्ठितम् |  १८   क
एवमप्यशुभं कर्म न भूतं न भविष्यति ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति