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शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
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नारद उवाच
अनिष्टसम्प्रय़ोगाच्च विप्रय़ोगात्प्रिय़स्य च |  ४   क
मनुष्या मानसैर्दुःखैर्युज्यन्ते अल्पवुद्धय़ः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति