शान्ति पर्व  अध्याय ३१६

नारद उवाच

निवन्धनी रज्जुरेषा या ग्रामे वसतो रतिः |  ३७   क
छित्त्वैनां सुकृतो यान्ति नैनां छिन्दन्ति दुष्कृतः ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति