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शल्य पर्व
अध्याय ३१
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युधिष्ठिर उवाच
आमुञ्च कवचं वीर मूर्धजान्यमय़स्व च |  ५२   क
यच्चान्यदपि ते नास्ति तदप्यादत्स्व भारत |  ५२   ख
इममेकं च ते कामं वीर भूय़ो ददाम्यहम् ||  ५२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति