भीष्म पर्व  अध्याय ३१

श्रीभगवानु उवाच

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु |  ३४   क
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्पराय़णः ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति