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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३१
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व्राह्मण उवाच
त्रय़ो वै रिपवो लोके नव वै गुणतः स्मृताः |  १   क
हर्षः स्तम्भोऽभिमानश्च त्रय़स्ते सात्त्विका गुणाः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति