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शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
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भीष्म उवाच
धनस्य यस्य राजतो भय़ं न चास्ति चौरतः |  ४५   क
मृतं च यन्न मुञ्चति समर्जय़स्व तद्धनम् ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति