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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
यथा क्षेत्रं मृदूभूतमद्भिराप्लावितं तथा |  ३२   क
जनय़त्यङ्कुरं कर्म नृणां तद्वत्पुनर्भवम् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति