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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
ज्ञानेन कुरुते यत्नं यत्नेन प्राप्यते महत् |  ३०   क
महद्द्वन्द्वप्रमोक्षाय़ सा सिद्धिर्या वय़ोतिगा ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति