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उद्योग पर्व
अध्याय ३०
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युधिष्ठिर उवाच
सन्त्येव मे व्राह्मणेभ्यः कृतानि; भावीन्यथो नो वत वर्तय़न्ति |  ४१   क
पश्याम्यहं युक्तरूपांस्तथैव; तामेव सिद्धिं श्रावय़ेथा नृपं तम् ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति