शान्ति पर्व  अध्याय ३०

वासुदेव उवाच

अन्योन्यस्य स आख्येय़ इति तद्वै मृषा कृतम् |  २०   क
भवता वचनं व्रह्मंस्तस्मादेतद्वदाम्यहम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति