शान्ति पर्व  अध्याय ३

नारद उवाच

अव्रवीत्तु स मां क्रोधात्तव पूर्वपितामहः |  २१   क
मूत्रश्लेष्माशनः पाप निरय़ं प्रतिपत्स्यसे ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति