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शान्ति पर्व
अध्याय २९४
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वसिष्ठ उवाच
सम्यङ्निदर्शनं नाम प्रत्यक्षं प्रकृतेस्तथा |  ४५   क
गुणतत्त्वान्यथैतानि निर्गुणोऽन्यस्तथा भवेत् ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति