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वन पर्व
अध्याय २९३
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वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु धृतराष्ट्रस्य वै सखा |  १   क
सूतोऽधिरथ इत्येव सदारो जाह्नवीं यय़ौ ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति