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कर्ण पर्व
अध्याय २९
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सञ्जय़ उवाच
शौरे रथं वाहय़तोऽर्जुनस्य; वलं महास्त्राणि च पाण्डवस्य |  २   क
अहं विजानामि यथावदद्य; परोक्षभूतं तव तत्तु शल्य ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति