उद्योग पर्व  अध्याय २९

वासुदेव उवाच

अतोऽन्यथा रथिना फल्गुनेन; भीमेन चैवाहवदंशितेन |  ४३   क
परासिक्तान्धार्तराष्ट्रांस्तु विद्धि; प्रदह्यमानान्कर्मणा स्वेन मन्दान् ||  ४३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति