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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २९
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अर्जुन उवाच
मत्समो यदि सङ्ग्रामे शरासनधरः क्वचित् |  ६   क
विद्यते तं ममाचक्ष्व यः समासीत मां मृधे ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति