अनुशासन पर्व  अध्याय २९

भीष्म उवाच

मतङ्ग सम्प्रधार्यैतद्यदहं त्वामचूचुदम् |  १६   क
वृणीष्व काममन्यं त्वं व्राह्मण्यं हि सुदुर्लभम् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति