शान्ति पर्व  अध्याय २८५

पराशर उवाच

राजन्नैतद्भवेद्ग्राह्यमपकृष्टेन जन्मना |  १२   क
महात्मनां समुत्पत्तिस्तपसा भावितात्मनाम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति