वन पर्व  अध्याय २८३

वैशम्पाय़न उवाच

एवं स पाण्डवस्तेन अनुनीतो महात्मना |  १६   क
विशोको विज्वरो राजन्काम्यके न्यवसत्तदा ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति