शान्ति पर्व  अध्याय २८०

पराशर उवाच

कृतानि यानि कर्माणि दैवतैर्मुनिभिस्तथा |  १७   क
नाचरेत्तानि धर्मात्मा श्रुत्वा चापि न कुत्सय़ेत् ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति