अनुशासन पर्व  अध्याय २८

भीष्म उवाच

व्रूहि रासभि कल्याणि माता मे येन दूषिता |  १४   क
कथं मां वेत्सि चण्डालं क्षिप्रं रासभि शंस मे ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति