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शान्ति पर्व
अध्याय २७९
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भीष्म उवाच
भीरू राजन्यो व्राह्मणः सर्वभक्षो; वैश्योऽनीहावान्हीनवर्णोऽलसश्च |  २४   क
विद्वांश्चाशीलो वृत्तहीनः कुलीनः; सत्याद्भ्रष्टो व्राह्मणः स्त्री च दुष्टा ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति