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शान्ति पर्व
अध्याय २७८
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भीष्म उवाच
ततः पिनाकी योगात्मा ध्यानय़ोगं समाविशत् |  २७   क
उशना तु समुद्विग्नो निलिल्ये जठरे ततः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति