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शान्ति पर्व
अध्याय २७७
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भीष्म उवाच
पञ्चभूतसमुद्भूतं लोकं यश्चानुपश्यति |  ३६   क
तथा च वर्तते दृष्ट्वा लोकेऽस्मिन्मुक्त एव सः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति