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शान्ति पर्व
अध्याय २७६
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नारद उवाच
एवं प्रवर्तमानस्य वृत्तिं प्रणिहितात्मनः |  ५८   क
तपसैवेह वहुलं श्रेय़ो व्यक्तं भविष्यति ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति