वन पर्व  अध्याय २७५

मार्कण्डेय़ उवाच

अय़ोध्यां स समासाद्य पुरीं राष्ट्रपतिस्ततः |  ५९   क
भरताय़ हनूमन्तं दूतं प्रस्थापय़त्तदा ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति