शान्ति पर्व  अध्याय २७४

भीष्म उवाच

वहुरूपधरा हृष्टा नानाप्रहरणोद्यताः |  १४   क
देवस्यानुचरास्तत्र तस्थिरे चानलोपमाः ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति