वन पर्व  अध्याय २७३

मार्कण्डेय़ उवाच

अशोकवनिकास्थां तां रामदर्शनलालसाम् |  २७   क
खड्गमादाय़ दुष्टात्मा जवेनाभिपपात ह ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति