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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
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भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा स कौन्तेय़ वृत्रः प्राणानवासृजत् |  ५८   क
योजय़ित्वा तथात्मानं परं स्थानमवाप्तवान् ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति