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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
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भीष्म उवाच
लीलय़ाल्पं यथा गात्रात्प्रमृज्यादात्मनो रजः |  १३   क
वहु यत्नेन महता दोषनिर्हरणं तथा ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति