menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २६३
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
दह्यमानेन तु हृदा रामोऽभ्यपतदाश्रमम् |  १५   क
स ददर्श तदा गृध्रं निहतं पर्वतोपमम् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति