अनुशासन पर्व  अध्याय २६

अङ्गिरा उवाच

महाश्रम उपस्पृश्य योऽग्निहोत्रपरः शुचिः |  १६   क
एकमासं निराहारः सिद्धिं मासेन स व्रजेत् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति