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वन पर्व
अध्याय २५५
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वैशम्पाय़न उवाच
द्वादशानां तु सर्वेषां सौवीराणां धनञ्जय़ः |  २७   क
चकर्त निषितैर्भल्लैर्धनूंषि च शिरांसि च ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति