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शान्ति पर्व
अध्याय २५५
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तुलाधार उवाच
उत यज्ञा उताय़ज्ञा मखं नार्हन्ति ते क्वचित् |  ३७   क
आज्येन पय़सा दध्ना पूर्णाहुत्या विशेषतः |  ३७   ख
वालैः शृङ्गेण पादेन सम्भवत्येव गौर्मखम् ||  ३७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति