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शान्ति पर्व
अध्याय २५५
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तुलाधार उवाच
स्वय़ं यूपानुपादाय़ यजन्ते स्वाप्तदक्षिणैः |  ३१   क
यस्तथाभावितात्मा स्यात्स गामालव्धुमर्हति ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति