आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २५

वैशम्पाय़न उवाच

स दीक्षां तत्र सम्प्राप्य राजा कौरवनन्दनः |  १२   क
शतय़ूपाश्रमे तस्मिन्निवासमकरोत्तदा ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति