अनुशासन पर्व  अध्याय २४

भीष्म उवाच

अकल्कको ह्यतर्कश्च व्राह्मणो भरतर्षभ |  ३०   क
ससञ्ज्ञो भैक्ष्यवृत्तिश्च स राजन्केतनक्षमः ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति