शान्ति पर्व  अध्याय २३८

व्यास उवाच

महतः परमव्यक्तमव्यक्तात्परतोऽमृतम् |  ४   क
अमृतान्न परं किञ्चित्सा काष्ठा सा परा गतिः ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति