शान्ति पर्व  अध्याय २३८

व्यास उवाच

चित्तप्रसादेन यतिर्जहाति हि शुभाशुभम् |  १०   क
प्रसन्नात्मात्मनि स्थित्वा सुखमानन्त्यमश्नुते ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति