शान्ति पर्व  अध्याय २३१

व्यास उवाच

न ह्ययं चक्षुषा दृश्यो न च सर्वैरपीन्द्रिय़ैः |  १६   क
मनसा सम्प्रदीप्तेन महानात्मा प्रकाशते ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति