वन पर्व  अध्याय २३

वैशम्पाय़न उवाच

एवमुक्त्वा महावाहुः कौरवं पुरुषोत्तमः |  ४२   क
आमन्त्र्य प्रय़यौ धीमान्पाण्डवान्मधुसूदनः ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति