वन पर्व  अध्याय २३

वासुदेव उवाच

जहि शाल्वं महावाहो मैनं जीवय़ केशव |  २२   क
सर्वैः पराक्रमैर्वीर वध्यः शत्रुरमित्रहन् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति