menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
chevron_left
chevron_right
श्रीरु उवाच
जितकाशिनि शूरे च सङ्ग्रामेष्वनिवर्तिनि |  २४   क
निवसामि मनुष्येन्द्रे सदैव वलसूदन ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति