शान्ति पर्व  अध्याय २२०

भीष्म उवाच

प्रह्रादो नमुचिर्दक्षो विप्रचित्तिर्विरोचनः |  ५०   क
ह्रीनिषेधः सुहोत्रश्च भूरिहा पुष्पवान्वृषः ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति