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शान्ति पर्व
अध्याय २२०
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भीष्म उवाच
धैर्येण युक्तस्य सतः शरीरं न विशीर्यते |  ४   क
आरोग्याच्च शरीरस्य स पुनर्विन्दते श्रिय़म् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति