कर्ण पर्व  अध्याय २२

धृतराष्ट्र उवाच

कर्णमाश्रित्य सङ्ग्रामे दर्पो दुर्योधने पुनः |  १८   क
जेतुमुत्सहते पार्थान्सपुत्रान्सहकेशवान् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति